नैनीताल – नैनी झील के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। झील में स्थापित मत्स्य केज में लगभग 300 स्नोट्राउट मछलियों का संचय और संरक्षण किया गया है, जिससे जल की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
इस कार्यक्रम में कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने प्रतिभाग किया। उन्होंने बताया कि नैनी झील में महाशीर और स्नोट्राउट जैसी प्रजातियां 1990 के दशक से लगभग विलुप्त हो चुकी थीं।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2005 में महाशीर प्रजाति का पुनर्संवर्धन शुरू किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब लंबे अंतराल के बाद स्नोट्राउट मछली को भी पुनः झील में स्थापित किया जा रहा है।
इस परियोजना में कुमाऊं विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और जंतु विज्ञान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मछली झील में पनप रही काई को नियंत्रित करेगी, जिससे पानी में नाइट्रोजन का स्तर संतुलित रहेगा और ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल नैनी झील के जैविक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित होगी और जल गुणवत्ता सुधारने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।









