हिमालय दिवस: ओम पर्वत से गायब हुई बर्फ, मिलम ग्लेशियर भी एक किमी पीछे खिसका

अल्मोड़ा/पिथौरागढ़ – पर्यावरण असंतुलन, बढ़ता तापमान और हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते मानवीय दबाव का असर अब हिमालय के ग्लेशियरों पर साफ दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है और इसका सीधा असर हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ जल स्रोतों पर भी

हिमालय दिवस: ओम पर्वत से गायब हुई बर्फ, मिलम ग्लेशियर भी एक किमी पीछे खिसका

अल्मोड़ा/पिथौरागढ़ – पर्यावरण असंतुलन, बढ़ता तापमान और हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते मानवीय दबाव का असर अब हिमालय के ग्लेशियरों पर साफ दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार लगातार बढ़ रही है और इसका सीधा असर हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ जल स्रोतों पर भी पड़ सकता है। वैज्ञानिकों ने इसे भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बताया है। अल्मोड़ा स्थित जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिकों के अध्ययन और पर्यावरण विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार पिछले दशकों में ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक वर्ष 1985 से 2002 के बीच ग्लेशियरों के पिघलने की दर करीब तीन गुना तक बढ़ी। इसके बाद भी इसके और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान