नैनीताल में नाबार्ड की कार्यशाला, ग्रामीण विकास की संभावनाओं पर हुआ मंथन

हल्द्वानी – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) नैनीताल द्वारा शुक्रवार को रामपुर रोड स्थित एक होटल में “ग्राउंड लेवल क्रेडिट (जीएलसी) संवर्धन एवं प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बैंकिंग क्षेत्र, कृषि, उद्यान, उद्योग एवं सहकारी संस्थाओं के अधिकारियों ने भाग लेते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने और वित्तीय समावेशन को मजबूत करने पर मंथन किया।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने कहा कि नैनीताल जनपद में कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में संस्थागत ऋण उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने बैंक अधिकारियों से किसानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों तथा ग्रामीण उद्यमियों तक ऋण सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया।

कार्यशाला के दौरान अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) अमित बाजपेयी ने जनपद की ऋण स्थिति, वार्षिक ऋण योजना (एसीपी), प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण तथा ग्राउंड लेवल क्रेडिट की प्रगति की समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाकर जनपद की ऋण क्षमता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

नैनीताल जिला सहकारी बैंक द्वारा अतिरिक्त किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) सीमा, दीनदयाल उपाध्याय योजना, पैक्स कम्प्यूटरीकरण, ई-पैक्स तथा बहुउद्देशीय पैक्स (एमपैक्स) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं के विस्तार की जानकारी दी गई। वहीं उत्तराखण्ड ग्रामीण बैंक ने कृषि एवं ग्रामीण ऋण वितरण की सफल कार्यप्रणालियों और वित्तपोषण मॉडल प्रस्तुत किए।

कार्यशाला में कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों ने संरक्षित खेती, फलोत्पादन, मूल्य संवर्धन, कृषि आधारित उद्योगों और विभागीय योजनाओं से जुड़ी वित्तीय संभावनाओं पर प्रकाश डाला। जिला उद्योग केन्द्र द्वारा एमएसएमई, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और ग्रामीण उद्यमिता विकास से संबंधित योजनाओं की जानकारी साझा की गई।

नाबार्ड द्वारा कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ), प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई), कृषि विपणन अवसंरचना (एएमआई), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) तथा ग्रामीण उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय सहायता और अवसरों पर विशेष सत्र भी आयोजित किया गया।

कार्यशाला में बैंकों एवं विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में ऋण प्रवाह बढ़ाने तथा पात्र लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ने के लिए विभिन्न सुझावों पर चर्चा की गई। साथ ही आगामी अवधि में ग्राउंड लेवल क्रेडिट में वृद्धि के लिए प्रत्येक बैंक को कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम में नैनीताल जिला सहकारी बैंक, उत्तराखण्ड ग्रामीण बैंक, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, जिला उद्योग केन्द्र, नाबार्ड तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी एवं शाखा प्रबंधक मौजूद रहे।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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