150 से अधिक आपदा पीड़ित पहुँचे अस्पताल, डर और बेचैनी से परेशान….

देहरादून – हाल ही में हुई अतिवृष्टि और बादल फटने की घटनाओं ने न सिर्फ़ लोगों की ज़िंदगी और रोज़गार छीना बल्कि उनकी मनोदशा पर भी गहरा असर डाला है। आपदा के मंजर से गुज़रे अधिकांश लोग अब भी भय और सदमे में हैं। नींद न आना, बेचैनी, बार-बार भयावह दृश्य याद आना और हल्की-सी आवाज़ पर चौंक जाना जैसे लक्षण आम हो गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई लोग पीटीएसडी (पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) से जूझ रहे हैं, जिसे उबरने में सालों लग सकते हैं।

मालदेवता पीएचसी पहुँचे 150 से अधिक लोग

देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में सबसे ज़्यादा तबाही हुई। पीएचसी प्रभारी डॉ. एमए भट्ट के मुताबिक़, 150 से अधिक लोग इलाज और परामर्श के लिए पहुंचे। इन लोगों को घटना की बार-बार याद आने से बेचैनी, तेज धड़कन और अनिद्रा जैसे लक्षण थे।

धराली, थराली और कर्णप्रयाग के जख्म गहरे

  • धराली (उत्तरकाशी): 5 अगस्त की आपदा में कई परिवारों की उम्रभर की कमाई मिनटों में बह गई। किसी का घर ढहा तो किसी का होटल और बागान जमींदोज हो गया। कई परिजनों की मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
  • कर्णप्रयाग (चमोली): सेरा गांव में महिपाल सिंह गुसाईं का घर और गोशाला बह गए। बेटी की शादी का सपना भी आपदा के सैलाब में टूट गया। सदमे से उनकी पत्नी की हालत बिगड़ गई।
  • थराली और चेपड़ों: यहाँ रातोंरात बाजार और घर मलबे के ढेर में बदल गए। लोगों की दुकानें, वाहन और कारोबार सब तबाह हो गए। इससे आर्थिक बोझ के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ गया।

डॉक्टरों की चेतावनी

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. मोहित सैनी ने कहा कि आपदा पीड़ितों में अवसाद, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण आम हैं। यह मनोदशा तीन-चार साल तक बनी रह सकती है। इसे “पोस्ट वियतनाम सिंड्रोम” भी कहा जाता है।

कैसे मिलेगी राहत?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे लोगों को मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग, योग, सामूहिक प्रार्थना और परिवार के साथ संवाद से राहत मिल सकती है। सामुदायिक सहयोग और परामर्श केंद्र स्थापित करने की ज़रूरत है, ताकि लोग इस मानसिक आघात से उबर सकें।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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