गुरु पूर्णिमा पर बृहस्पति-चंद्रमा का विशेष संयोग, श्रद्धा और साधना का अनूठा अवसर

देहरादून – भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन का मार्गदर्शक माना गया है। गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और समर्पण का प्रतीक गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई (बुधवार) को पूरे देश में श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग इस पर्व के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा रहा है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रमा मकर राशि में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जबकि देवगुरु बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी। बुधवार का संयोग इस पर्व को और अधिक शुभ बना रहा है। ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, विवेक, सद्बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का कारक माना जाता है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में यह संयोग ज्ञान, विवेक और मानसिक संतुलन का प्रतीक माना जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल स्नान कर अपने इष्टदेव का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद गुरु का विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना शुभ माना जाता है। श्रद्धानुसार गुरु को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, फल, मिठाई अथवा अन्य पीली वस्तुएं भेंट कर सम्मान प्रकट किया जाता है। साथ ही उनके बताए आदर्शों और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लेने का भी विशेष महत्व है।

सायंकाल चंद्रोदय के बाद चंद्रदेव को जल में दूध और अक्षत मिलाकर अर्घ्य अर्पित करना शुभ फलदायी माना गया है। इस अवसर पर भगवान शिव का ध्यान करते हुए “ॐ सोमेश्वराय नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने से मन की शांति, सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होने की मान्यता है।

धर्माचार्यों का कहना है कि गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश केवल गुरु का पूजन करना नहीं, बल्कि उनके द्वारा दिए गए ज्ञान, संस्कार और जीवन मूल्यों को अपने व्यवहार में उतारना है। यही सच्चे अर्थों में गुरु के प्रति सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें