रामनगर – कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में पार्क प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। जल्द ही रिजर्व की सीमाओं पर अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित स्मार्ट कैमरे लगाए जाएंगे, जो बाघ, हाथी, गुलदार सहित अन्य वन्यजीवों की पहचान कर उनकी गतिविधियों की रियल टाइम जानकारी कंट्रोल रूम और वनकर्मियों तक पहुंचाएंगे।
सीटीआर प्रशासन के अनुसार वर्तमान में पार्क में वनों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एम-स्ट्राइप, सर्विलांस सिस्टम सहित विभिन्न आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। अब निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए एआई लैस कैमरों को पूरी सीमा पर चरणबद्ध तरीके से स्थापित करने की योजना तैयार की जा रही है।
इसके लिए जल्द ही विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कंपनियां अपने कैमरों की तकनीकी विशेषताओं का प्रदर्शन करेंगी। डेमो के दौरान कैमरों की रेंज, एआई आधारित पहचान प्रणाली, नाइट विजन, मोशन सेंसर, लाइव अलर्ट सिस्टम, बैटरी बैकअप और डेटा ट्रांसमिशन जैसी सुविधाओं का परीक्षण किया जाएगा। सभी तकनीकी पहलुओं के मूल्यांकन के बाद ही कैमरों के चयन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पार्क प्रशासन ने बताया कि इससे पहले भी रिजर्व के कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में एआई कैमरों का परीक्षण किया जा चुका है। इन कैमरों के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, अवैध शिकार तथा वनों में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखने में सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
करीब 1,288 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कैमरों की संख्या उनकी निगरानी क्षमता और कवरेज क्षेत्र के आधार पर तय की जाएगी। जिन इलाकों में वन्यजीवों की आवाजाही अधिक रहती है तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले कैमरे लगाए जाएंगे।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने बताया कि पार्क की सीमाओं पर एआई आधारित कैमरे लगाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से वन्यजीवों की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण अधिक प्रभावी होगा। विभिन्न कंपनियों के डेमो और तकनीकी परीक्षण के बाद उपयुक्त कैमरों का चयन कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थापित किया जाएगा।












