समानता की दिशा में कानून और समाज के बीच अंतर पर हुआ विमर्श….

रुद्रपुर – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर शहीद भगत सिंह पुस्तकालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस (CSTU) द्वारा किया गया, जिसमें महिला अधिकारों, समानता और समाज में महिलाओं के संघर्ष को लेकर गहन चर्चा हुई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि यह दिन महिलाओं के शोषण, अत्याचार और पुरुष वर्चस्ववाद के खिलाफ लड़ाई और जीवन के हर क्षेत्र में समानता के लिए उनके संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि आज देश में पूंजीवाद और कुछ राजनीतिक शक्तियों के गठजोड़ के कारण महिलाओं के अधिकारों पर लगातार हमला हो रहा है। ऑनर किलिंग और मजदूर विरोधी श्रम कोड इसके स्पष्ट उदाहरण हैं।

वशिष्ट वक्ता शिक्षिका प्रीति मौर्य ने घर और समाज में मौजूद असमानताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पिता अपनी बेटी को वास्तविक संपत्ति का अधिकार देंगे, अपने करियर या जीवन साथी का चुनाव करने की स्वतंत्रता देंगे? उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर बराबरी का वास्तविक अर्थ क्या है।

प्राध्यापक कमला बिष्ट ने कहा कि कानूनों में भले बराबरी का जिक्र हो, लेकिन जब तक सामाजिक और मानसिक स्तर पर समानता नहीं मिलेगी, तब तक बराबरी का दावा केवल दिखावा है।

सावित्री देवी ने कहा कि वर्तमान दौर में सामंती मूल्य, पूंजीवादी-साम्राज्यवादी लूट और फासीवादी हमलों से एकसाथ निपटना ही महिला मुक्ति का रास्ता है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला मुक्ति आंदोलन को मेहनतकश वर्ग के मुक्ति आंदोलन से जोड़कर ही आगे बढ़ाया जा सकता है।

कार्यक्रम और चर्चा में मुकुल, धीरज जोशी, अंजार अहमद, विकल, हरपाल, लोकेश पाठक, अतुल त्रिपाठी, संदीप कुमार, विजय, देवेन्द्र, के एन झा, महेन्द्र सिंह, उमेश आदि ने भी भागीदारी की।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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