नैनीताल – आगामी मानसून सीजन के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं, भूस्खलन, बाढ़ एवं नदी-नालों के उफान जैसी परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से गुरुवार को जनपद नैनीताल में वृहद मानसून पूर्व मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के निर्देशन में आयोजित इस महाअभ्यास में जिला प्रशासन, नैनीताल पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, अग्निशमन, स्वास्थ्य विभाग सहित 15 से अधिक विभागों ने संयुक्त रूप से भाग लेकर आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों का व्यापक परीक्षण किया।
मॉक ड्रिल के दौरान जनपद के पांच संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन, बाढ़, जलभराव और मार्ग अवरुद्ध होने जैसी काल्पनिक आपदा परिस्थितियां तैयार की गईं। राहत एवं बचाव दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 65 घायलों एवं प्रभावितों का सफल रेस्क्यू किया। घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद विभिन्न चिकित्सालयों एवं सुरक्षित स्टेजिंग एरिया में पहुंचाया गया।
मल्लीताल के आलमा कॉटेज में भूस्खलन का परिदृश्य
नैनीताल के मल्लीताल स्थित आलमा कॉटेज क्षेत्र में भूस्खलन एवं भवन क्षतिग्रस्त होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें कुल आठ लोग प्रभावित बताए गए। इनमें चार लोग गंभीर रूप से घायल थे। उपजिलाधिकारी नवाजिश खलीक एवं क्षेत्राधिकारी अंजना नेगी के नेतृत्व में सीओ यूटी अंकित थपलियाल, प्रभारी निरीक्षक मल्लीताल राजेंद्र सिंह रावत, पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीम ने तत्काल राहत अभियान चलाया। मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालकर तीन गंभीर घायलों को बी.डी. पांडे अस्पताल भेजा गया, जबकि पांच लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
बेतालघाट की काली पहाड़ी में मलबा गिरने की स्थिति पर अभ्यास
बेतालघाट के बधों स्थित काली पहाड़ी क्षेत्र में पहाड़ी दरकने और सड़क अवरुद्ध होने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। इस दौरान नौ लोग प्रभावित दिखाए गए, जिनमें पांच सामान्य रूप से घायल थे। उपजिलाधिकारी अनुराग आर्य एवं थानाध्यक्ष विजय नेगी के नेतृत्व में पुलिस एवं एसडीआरएफ की टीम ने राहत अभियान चलाते हुए घायलों को सुरक्षित बाहर निकाला। एक घायल को एसटीएस तथा तीन घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गरमपानी भेजा गया।
कालाढूंगी के निहाल नाले में अचानक आई बाढ़
कालाढूंगी के निहाल नाले में अचानक जलस्तर बढ़ने और लोगों के फंसने का परिदृश्य तैयार किया गया। इस दौरान 12 लोगों के प्रभावित होने की सूचना पर उपजिलाधिकारी सुधीर कुमार एवं प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार सैनी के नेतृत्व में एनडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, फायर सर्विस तथा पुलिस की संयुक्त टीम ने सभी लोगों को सुरक्षित निकालकर सीएचसी कालाढूंगी सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया।
लालकुआं में सबसे बड़ा रेस्क्यू अभियान
लालकुआं के बिंदुखत्ता स्थित गौला नदी में बाढ़ और तटीय जलभराव की स्थिति को सबसे बड़े परिदृश्य के रूप में तैयार किया गया, जिसमें 28 लोगों के फंसे होने की सूचना दी गई। उपजिलाधिकारी रेखा कोहली एवं प्रभारी निरीक्षक बृजमोहन सिंह राणा के नेतृत्व में एनडीआरएफ, आईटीबीपी, फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर सभी लोगों को सुरक्षित निकाला। एक घायल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लालकुआं भेजा गया, जबकि शेष 27 लोगों को सुरक्षित स्टेजिंग एरिया में पहुंचाया गया।
गौलापार स्टेडियम बना मुख्य समन्वय केंद्र
हल्द्वानी के गोलापार अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम को मुख्य समन्वय एवं राहत केंद्र बनाया गया। यहां आठ प्रभावितों को लाकर राहत एवं उपचार की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। अपर पुलिस अधीक्षक एवं सीओ हल्द्वानी अमित कुमार तथा उपजिलाधिकारी हल्द्वानी के नेतृत्व में सीओ यूटी विनय सिंह, प्रभारी निरीक्षक विजय मेहता, प्रभारी निरीक्षक काठगोदाम जसवीर सिंह चौहान, सीआरपीएफ, जीआरपी और फायर सर्विस की संयुक्त टीम ने तीन घायलों को सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा, जबकि पांच लोगों को स्टेजिंग एरिया में सुरक्षित रखा गया।
संचार व्यवस्था भी रही मजबूत
मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस संचार व्यवस्था की भी प्रभावशीलता परखी गई। पुलिस अधीक्षक संचार रेवाधर मठपाल के पर्यवेक्षण एवं निरीक्षक पुलिस दूरसंचार राजू कुमार बिष्ट के नेतृत्व में पांचों तहसीलों के स्टेजिंग एरिया में अस्थायी वायरलेस स्टेशन स्थापित किए गए। इनके माध्यम से घटनास्थलों से जिला आपदा परिचालन केंद्र (DEOC), राज्य आपदा परिचालन केंद्र (SEOC), रेंज कंट्रोल एवं वरिष्ठ अधिकारियों तक सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान किया गया।
कुछ ही मिनटों में पहुंचीं रेस्क्यू टीमें
मॉक ड्रिल के दौरान राहत एवं बचाव दलों के रिस्पॉन्स टाइम का भी आकलन किया गया। लालकुआं में सूचना मिलने के मात्र छह मिनट के भीतर टीम घटनास्थल पर पहुंच गई। इसी प्रकार गोलापार, मल्लीताल, कालाढूंगी एवं बेतालघाट में भी निर्धारित समय के भीतर रेस्क्यू दलों ने मौके पर पहुंचकर राहत अभियान शुरू कर दिया। सभी स्थानों पर दोपहर करीब 1:55 बजे तक राहत एवं बचाव कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया।
एसएसपी बोले— वास्तविक आपदा में और प्रभावी होगी प्रतिक्रिया
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने बताया कि इस व्यापक मॉक ड्रिल के माध्यम से विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, पुलिस संचार व्यवस्था, राहत एवं बचाव उपकरणों तथा आपदा प्रबंधन प्रणाली की बारीकी से समीक्षा की गई है। उन्होंने कहा कि इस अभ्यास से मिली सीख वास्तविक आपदा के समय कम से कम समय में राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने तथा जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।











