भीमताल झील की गहराई से लेकर सिल्ट तक की होगी जांच, विशेषज्ञ तैयार करेंगे रिपोर्ट

भीमताल – उत्तराखंड की प्रमुख झीलों में शामिल भीमताल झील के संरक्षण और उसकी जलधारण क्षमता में आ रही कमी को दूर करने के लिए अब विभिन्न विभाग मिलकर काम करेंगे। स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (सारा) ने झील के संरक्षण की दिशा में पहल तेज कर दी है। इसके तहत झील की गहराई, जलस्रोतों, सिल्ट जमाव, पानी की गुणवत्ता और जलीय जैव विविधता का अध्ययन कराया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर संरक्षण और सुधार के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

अब तक नदियों और प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन पर काम कर रही सारा ने तालाबों और झीलों के संरक्षण की दिशा में भी प्रयास शुरू किए हैं। इसी क्रम में भीमताल झील को संरक्षण कार्यों के लिए चुना गया है। झील का महत्व पेयजल आपूर्ति और पर्यटन दोनों दृष्टि से है। ऐसे में इसकी जलधारण क्षमता बनाए रखना और प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई विभागों और विशेषज्ञ संस्थानों का लिया जाएगा सहयोग

सारा की एसीईओ कहकशां नसीम के अनुसार, भीमताल झील की जलधारण क्षमता कम होने के मद्देनजर संरक्षण की योजना तैयार की जा रही है। इस कार्य में केंद्रीय भूमिजल बोर्ड, कुमाऊं विश्वविद्यालय, झील विकास प्राधिकरण और सिंचाई विभाग सहित अन्य संबंधित संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों के साथ बैठक की जा चुकी है और उन्हें योजना तैयार करने के लिए कहा गया है। विभिन्न संस्थानों से मिलने वाली तकनीकी जानकारी और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे के कार्य तय किए जाएंगे।

बाथीमेट्री सर्वे से पता चलेगी झील की गहराई

संरक्षण योजना के तहत भीमताल झील का बाथीमेट्री सर्वे कराया जाएगा। इसके माध्यम से झील की गहराई और जलाशय की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जाएगा। साथ ही झील के भीतर मौजूद प्राकृतिक जलस्रोतों यानी स्प्रिंग की संख्या, उनकी स्थिति और उनसे झील में आने वाले पानी की मात्रा का पता लगाया जाएगा।

यदि किसी जलस्रोत की स्थिति खराब पाई जाती है, तो उसे बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाएंगे। इसका उद्देश्य झील में पानी की उपलब्धता बनाए रखने वाले प्राकृतिक स्रोतों की स्थिति को समझना और उनके संरक्षण के उपाय तलाशना है।

सिल्ट जमाव और उसके स्रोतों का होगा अध्ययन

झील में जमा सिल्ट यानी गाद की मात्रा और उसके प्रभाव का भी आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि झील में सिल्ट कहां से और कितनी मात्रा में पहुंच रही है। अध्ययन के आधार पर गाद जमाव के कारणों को समझने और उसके प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक उपाय सुझाए जाएंगे।

सारा के विशेषज्ञ ओंकार सिंह ने बताया कि झील के पानी की गुणवत्ता और जलीय जैव विविधता की स्थिति का भी अध्ययन किया जाएगा। यदि जांच में किसी तरह की कमी या समस्या सामने आती है, तो उसके सुधार के लिए संबंधित संस्थानों की मदद से कदम उठाए जाएंगे।

रिपोर्ट के आधार पर तय होंगे संरक्षण कार्य

संबंधित विभाग और विशेषज्ञ संस्थान अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। इसके आधार पर झील के संरक्षण, प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन, सिल्ट प्रबंधन और जल गुणवत्ता में सुधार के लिए आगे की कार्ययोजना बनाई जाएगी।

भीमताल झील पेयजल और पर्यटन की दृष्टि से क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रस्तावित अध्ययन से झील की मौजूदा स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करने और दीर्घकालीन संरक्षण के उपाय तय करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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