बुरांश से पहाड़ी नमक तक, नथुवाखान के हरीश ने स्थानीय उत्पादों को दी नई पहचान

नैनीताल – पहाड़ की मिट्टी, पारंपरिक स्वाद और स्थानीय संसाधनों को रोजगार का जरिया बनाया जाए तो गांव में रहकर भी आत्मनिर्भरता की मजबूत राह तैयार की जा सकती है। रामगढ़ विकासखंड के ग्राम नथुवाखान निवासी हरीश सिंह बिष्ट ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। नौकरी छोड़कर गांव लौटे हरीश ने पारंपरिक सिलबट्टे पर तैयार होने वाले पहाड़ी मसाला नमक को कारोबार का आधार बनाया और आज अपने उत्पादों के जरिए न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि करीब 35 महिलाओं समेत कई लोगों को आय के अवसर से जोड़ने में सहयोग कर रहे हैं।

हरीश बिष्ट का पहाड़ी मसाला नमक अपने पारंपरिक स्वाद के कारण खास पहचान बना रहा है। इसमें जीरा, हींग, लहसुन, अजवाइन, भांग दाना, जाखिया, भंगिरा, पुदीना, राई और सेंधा नमक जैसे स्थानीय एवं पारंपरिक मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सिलबट्टे पर पीसने की पारंपरिक विधि ही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों में भी इस उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है।

नौकरी छोड़ी, गांव में शुरू किया स्वरोजगार

हरीश बताते हैं कि विभिन्न संस्थाओं में काम करने के दौरान उन्हें टिकाऊ खेती, पोषण वाटिका तथा हर्बल एवं ऑर्गेनिक उत्पादों के निर्माण और विपणन का अनुभव मिला। इसी अनुभव ने उन्हें अपने गांव में ही कुछ नया करने की प्रेरणा दी। वर्ष 2022 में उन्होंने पार्ट टाइम स्तर पर हर्बल और पहाड़ी उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की शुरुआत की, जबकि 2023 से इसे पूर्णकालिक व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाया।

धीरे-धीरे कारोबार का दायरा बढ़ता गया और पारंपरिक पहाड़ी नमक के साथ उन्होंने कई अन्य स्थानीय उत्पाद भी तैयार करने शुरू किए।

बुरांश से लेकर पहाड़ी दाल तक उत्पादों की लंबी श्रृंखला

हरीश के उत्पादों में बुरांश टी, हर्बल टी, बुरांश जूस, विभिन्न प्रकार की चटनी, रोजमेरी, तुलसी, थाइम, नेटल, ऑर्गेनो, कैमोमाइल, लेमन ग्रास, भांग दाना, मड़वा आटा, मल्टीग्रेन आटा और पहाड़ी दाल शामिल हैं।

इन उत्पादों की पहुंच नैनीताल, कैंची धाम, भीमताल, खुरपाताल, नौकुचियाताल, रामनगर, कौसानी, अल्मोड़ा और मुक्तेश्वर समेत 250 से अधिक पर्यटक स्थलों तक बनाई जा चुकी है। अब कई ग्राहक घर बैठे भी इन उत्पादों की मांग करते हैं और ऑनलाइन माध्यम से ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं।

10 हजार से कम से शुरू हुआ सफर, 11 लाख तक पहुंचा कारोबार

हरीश की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2022 में उनका कारोबार 10 हजार रुपये से भी कम था। लगातार मेहनत, उत्पादों में नए प्रयोग और बाजार से जुड़ाव के चलते आज उनका वार्षिक टर्नओवर करीब 11 लाख रुपये तक पहुंच चुका है।

इस सफर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिली 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी महत्वपूर्ण साबित हुई। इस राशि से उन्होंने तौलने की मशीन, सीलिंग मशीन समेत आवश्यक उपकरण खरीदे। इससे उत्पादों की पैकिंग और विपणन को व्यवस्थित करने में मदद मिली।

35 महिलाओं समेत कई लोगों को मिला आय का जरिया

हरीश की पहल अब केवल उनके व्यक्तिगत व्यवसाय तक सीमित नहीं है। उनके काम से करीब 35 महिलाओं समेत कई लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आय बढ़ाने में सहयोग मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को रोजगार से जोड़ने का उनका यह मॉडल ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

हरीश का मानना है कि यदि उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों, रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, मॉल, संग्रहालयों, सरकारी गेस्ट हाउस और अन्य प्रमुख स्थानों पर स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार एवं स्टॉल की व्यवस्था हो, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सकता है।

स्थानीय उत्पादों को बाजार मिले तो बदलेगी पहाड़ की तस्वीर

हरीश कहते हैं कि पहाड़ में प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही बाजार और मंच उपलब्ध कराने की है। स्थानीय उत्पादों को पर्यटकों और देशभर के उपभोक्ताओं तक पहुंचाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

हरीश बिष्ट की कहानी इस बात की मिसाल है कि नौकरी की तलाश में शहरों की ओर जाने के बजाय स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक बाजार व्यवस्था के मेल से गांव में ही सम्मानजनक रोजगार खड़ा किया जा सकता है। पहाड़ी सिलबट्टे से शुरू हुआ उनका सफर अब स्थानीय स्वाद को नई पहचान देने के साथ आत्मनिर्भरता की कहानी भी लिख रहा है।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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