नैनीताल की ऐतिहासिक धरोहर अब डिजिटल मंच पर, AI Heritage App हुआ लॉन्च

नैनीताल। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने बुधवार को लोक भवन में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में ‘अतीत से वर्तमान तक: नैनीताल का सफर और गॉथिक राजभवन के निर्माण की अद्भुत गाथा’ पुस्तक का विमोचन किया। साथ ही AI Theme Room के मार्गदर्शन में विकसित AI Heritage & Tourism App का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि भारत के विकास का मार्ग उसकी समृद्ध विरासत और आधुनिक तकनीक के संतुलित समन्वय से होकर गुजरता है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को साकार करने के लिए सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और तकनीकी नवाचारों को समान महत्व देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमारी ऐतिहासिक विरासत हमें अपनी जड़ों से जोड़ती है, जबकि आधुनिक तकनीक भविष्य की दिशा तय करती है। यही समन्वय विकसित भारत-2047 की मजबूत आधारशिला बनेगा।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने लोक भवन को उत्तराखंड की प्रशासनिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्मृतियों का जीवंत केंद्र बताते हुए कहा कि यह भवन केवल एक स्थापत्य संरचना नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल से लेकर स्वतंत्र भारत और उत्तराखंड राज्य गठन तक की महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। लगभग 125 वर्ष पूर्व कठिन परिस्थितियों में निर्मित इस भवन की निर्माण गाथा मानव संकल्प, परिश्रम और दूरदर्शिता का अद्भुत उदाहरण है।

राज्यपाल ने कहा कि इतिहास केवल अभिलेखों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे नई पीढ़ियों तक पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से इस पुस्तक की परिकल्पना की गई। उन्होंने पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद एवं शोधकर्ता डॉ. गिरीश रंजन तिवारी को बधाई देते हुए कहा कि यह पुस्तक केवल राजभवन के निर्माण का इतिहास नहीं, बल्कि नैनीताल की सांस्कृतिक यात्रा, उत्तराखंड की विरासत और तत्कालीन सामाजिक परिवेश का भी महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

AI Heritage & Tourism App के बारे में जानकारी देते हुए राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में तकनीक को केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि संस्कृति और इतिहास के संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह एप लोक भवन, नैनीताल और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को डिजिटल माध्यम से विश्वभर के लोगों तक पहुंचाने का अभिनव प्रयास है।

राज्यपाल ने बताया कि इस ऐप में AI Heritage Guide, Smart Itinerary Planner और Interactive Time Capsule जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से पर्यटक और शोधार्थी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे तथा अपनी रुचि के अनुरूप यात्रा अनुभव को बेहतर बना सकेंगे। उन्होंने ऐप के “Hidden Gems” फीचर का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से स्थानीय नागरिक अपने क्षेत्र के कम प्रसिद्ध लेकिन महत्वपूर्ण सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों की जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि संस्कृति, लोक परंपराओं, आस्था और प्राकृतिक धरोहर से जुड़ा विषय है। इसलिए राज्य में ऐसे पर्यटन मॉडल को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जो पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी सशक्त बनाए।

राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत-2047 का संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक रूप से जागरूक, तकनीकी रूप से सक्षम, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और अपनी जड़ों से जुड़ा भारत बनाने का लक्ष्य है। आज विमोचित पुस्तक जहां अतीत से जोड़ती है, वहीं AI Heritage & Tourism App भविष्य की दिशा दिखाता है। दोनों मिलकर एक ऐसे भारत की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं जो अपनी विरासत पर गर्व करता है और नवाचार के साथ आगे बढ़ता है।

कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने इस पहल से जुड़े सिद्धार्थ माधव, तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं तथा सहयोगियों को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक और डिजिटल मंच विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक जागरूकता तथा उत्तरदायी पर्यटन के क्षेत्र में नई मिसाल स्थापित करेंगे।

इस अवसर पर वित्त नियंत्रक डॉ. तृप्ति श्रीवास्तव, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय, पुस्तक के लेखक डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, ऐप निर्माता सिद्धार्थ माधव, प्रकाशक संतोष सिंह सहित कुमाऊं विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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