रामनगर – उत्तराखंड वन विभाग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक और भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी डॉ. साकेत बडोला ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर अपने फैसले की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद वन विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने अपने निर्णय के पीछे किसी विभागीय कारण का उल्लेख नहीं किया है।
वर्ष 2008 बैच के आईएफएस अधिकारी डॉ. साकेत बडोला मूल रूप से पौड़ी जिले के कोटद्वार के निवासी हैं। वन सेवा में आने से पहले वह पशु चिकित्सक के रूप में कार्यरत थे। अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने तराई पश्चिमी वन प्रभाग, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह वन्यजीव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए गठित ट्रैफिकिंग सेल के प्रमुख की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक पद पर कार्य करने के बाद जुलाई 2024 में उनका तबादला कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक पद पर किया गया था। पिछले वर्ष उन्हें मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति मिली थी। उनकी सेवानिवृत्ति वर्ष 2037 में निर्धारित थी, लेकिन अब उन्होंने निर्धारित समय से करीब 11 वर्ष पहले सेवा छोड़ने का निर्णय लिया है।
सोशल मीडिया पोस्ट में व्यक्तिगत कारणों का किया जिक्र
डॉ. साकेत बडोला ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि कई महीनों तक गंभीर विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि पौड़ी जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवा का हिस्सा बनना उनके लिए सपने के साकार होने जैसा था।
उन्होंने अपने सेवाकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का प्रयास किया। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण में हरसंभव योगदान देने की उम्मीद जताई।
दो वर्षों में तीसरे आईएफएस अधिकारी के VRS आवेदन की चर्चा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में डॉ. साकेत बडोला उत्तराखंड वन विभाग के तीसरे आईएफएस अधिकारी बताए जा रहे हैं, जिन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया है। इससे पहले वन विभाग के मुखिया रह चुके एक अधिकारी भी वीआरएस ले चुके हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार वीआरएस मांगने का घटनाक्रम विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।










