नैनीताल – जिले में कानून-व्यवस्था मजबूत करने और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ललित मोहन रयाल की न्यायालय ने गुंडा नियंत्रण कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की है। न्यायालय ने आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए पांच व्यक्तियों को छह माह के लिए जिला बदर करने के आदेश जारी किए हैं। वहीं, विभिन्न परिस्थितियों को देखते हुए तीन मामलों में गुंडा एक्ट की कार्रवाई समाप्त करने और दो मामलों में नोटिस निरस्त करने के आदेश भी पारित किए गए।
एनडीपीएस और अन्य मामलों में पांच पर जिला बदर की कार्रवाई
जिला प्रशासन के अनुसार आसिफ पुत्र सिराजुद्दीन रहमान, निवासी मेडिकल गली, बनभूलपुरा के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। इसी तरह इरफान उर्फ शक्ति पुत्र मेहंदी हसन, निवासी गफूर बस्ती और अरशद अली पुत्र स्वर्गीय असगर अली, निवासी शनिबाजार गेट, बनभूलपुरा के खिलाफ भी एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज होने के आधार पर कार्रवाई की गई।
शाहनवाज पुत्र अशरफ, निवासी इंदिरा नगर, बनभूलपुरा के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, चोरी और आर्म्स एक्ट से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। वहीं राहुल बिष्ट उर्फ राहुल थापा पुत्र वीर बहादुर, निवासी गोकुल नगर, काठगोदाम के विरुद्ध आर्म्स एक्ट, चोरी और जुआ अधिनियम से संबंधित आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। इन सभी के खिलाफ छह माह के लिए जिला बदर के आदेश पारित किए गए हैं।
जेल में निरुद्ध तीन आरोपियों पर कार्रवाई समाप्त
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ मामलों में गुंडा एक्ट के तहत चल रही कार्रवाई को समाप्त करने के आदेश भी दिए। अमन गुप्ता पुत्र सीताराम, निवासी लालकुआं, शेखर आर्य उर्फ चंद्रशेखर पुत्र आनंद प्रसाद, निवासी गोलापार, काठगोदाम और मिराज पुत्र मोहम्मद हनीफ, निवासी बनभूलपुरा वर्तमान में अन्य मामलों में जेल में निरुद्ध हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए इनके विरुद्ध चल रही गुंडा एक्ट की न्यायालयीन कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर दो नोटिस निरस्त
महेंद्र पुत्र विपिन चंद्र, निवासी गोलापार, काठगोदाम के खिलाफ केवल आबकारी अधिनियम के एक मामले के आधार पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई शुरू की गई थी। सुनवाई के दौरान पर्याप्त आधार नहीं मिलने पर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने नोटिस निरस्त करते हुए कार्रवाई समाप्त कर दी।
इसी प्रकार चंदन लोदियाल पुत्र हरेंद्र सिंह, निवासी नथुआखान के खिलाफ पूर्व में ही जिला बदर की कार्रवाई हो चुकी थी। दोबारा कार्रवाई का पर्याप्त औचित्य नहीं पाए जाने पर न्यायालय ने नोटिस निरस्त कर दिया।
जिला प्रशासन की कार्रवाई से एक ओर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का संदेश गया है, वहीं दूसरी ओर पर्याप्त आधार और विधिसम्मत प्रक्रिया के सिद्धांत का भी पालन किया गया है।










