धान खेती में आधुनिक तकनीक अपनाने की तैयारी, पर्यावरण संरक्षण पर भी फोकस

देहरादून – उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में धान उत्पादन के लिए नई तकनीक अपनाने की दिशा में पहल शुरू की गई है। अब पारंपरिक रोपाई विधि के स्थान पर सीधी बुवाई विधि (डीएसआर) के परीक्षण की तैयारी की जा रही है। इस नई तकनीक के माध्यम से धान उत्पादन, लागत, पानी की खपत और पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।

प्रदेश में धान का सबसे अधिक उत्पादन ऊधम सिंह नगर जिले में होता है, जबकि हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर के मैदानी क्षेत्रों में फिलहाल रोपाई विधि के जरिए धान की खेती की जाती है। अब कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियां सीधी बुवाई तकनीक के जरिए धान उत्पादन की संभावनाओं का परीक्षण करेंगी।

इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि सीधी बुवाई विधि से तैयार धान की उपज पर क्या प्रभाव पड़ता है। साथ ही इसमें मीथेन गैस के उत्सर्जन, पानी की खपत, श्रमिकों की आवश्यकता और कुल लागत का भी तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि धान की पारंपरिक खेती में बड़ी मात्रा में मीथेन गैस का उत्सर्जन होता है, जो ग्रीन हाउस गैसों में शामिल है। ऐसे में नई तकनीक के जरिए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

यह पहल जलागम विभाग की विश्व बैंक पोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बरानी कृषि परियोजना के तहत शुरू की गई है। परियोजना का उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ, कम लागत वाला और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

परीक्षण के बाद प्राप्त परिणामों के आधार पर भविष्य में इस तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

Daily Dpark 24
Author: Daily Dpark 24

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